क्या है पूरा मामला?
राघव चड्ढा ने संसद में कहा कि आज ज्यादातर मोबाइल यूज़र्स रोजाना 1.5GB, 2GB या 3GB डेटा वाले प्लान्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इन प्लान्स की सबसे बड़ी समस्या यह है कि:
यूज़र का बचा हुआ डेटा रात 12 बजे एक्सपायर हो जाता है
बचे हुए डेटा को अगले दिन के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जाता
यूज़र का पैसा, फिर नुकसान क्यों?
राघव चड्ढा ने तर्क दिया कि जब यूज़र पूरे डेटा प्लान का पैसा देता है, तो अगर वह पूरा डेटा इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो बचा हुआ डेटा उसे अगले दिन मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा:
“अगर किसी यूज़र के 3GB प्लान में 1GB डेटा बच जाता है, तो वह उसका हक है और उसे अगले दिन इस्तेमाल करने का अधिकार मिलना चाहिए।”
30–40% डेटा हर महीने रह जाता है बेकार
चड्ढा ने यह भी बताया कि आम तौर पर हर यूज़र का लगभग 30% से 40% डेटा हर महीने बच जाता है, जो बिना इस्तेमाल के ही खत्म हो जाता है। इससे कंपनियों को फायदा होता है, जबकि यूज़र को नुकसान उठाना पड़ता है।
उपभोक्ता अधिकारों की मांग
इस मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने सरकार और टेलीकॉम कंपनियों से मांग की कि:
डेटा को कैरी फॉरवर्ड करने की सुविधा दी जाए
यूज़र्स के पैसे का पूरा मूल्य मिले
उपभोक्ता अधिकारों की बेहतर सुरक्षा हो
क्या हो सकता है असर?
अगर इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाता है, तो भविष्य में मोबाइल डेटा यूज़र्स को बड़ा फायदा मिल सकता है। इससे टेलीकॉम सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं का भरोसा भी मजबूत होगा।
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