नई दिल्ली/लेह, 23 मई: लद्दाख के लेह क्षेत्र के तांगत्से इलाके में भारतीय सेना का एक चीता हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि इस हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार तीनों सेना अधिकारी सुरक्षित बच गए और उन्हें केवल मामूली चोटें आई हैं। सेना के अधिकारियों ने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया है।
जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना बुधवार को हुई थी, लेकिन इसकी जानकारी शुक्रवार को सार्वजनिक की गई। हेलीकॉप्टर को एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर उड़ा रहे थे, जबकि इसमें 3 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) मेजर जनरल सचिन मेहता भी सवार थे।
सेना के अधिकारियों के मुताबिक हादसे के बाद हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी तीनों अधिकारी स्वयं बाहर निकलने में सफल रहे। उन्हें मामूली चोटें आई हैं और उनकी हालत पूरी तरह से स्थिर बताई जा रही है। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है।
इस बीच, भारतीय सेना ने अपने पुराने चीता और चेतक हेलीकॉप्टर बेड़े को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। अगले एक-दो वर्षों में इन पुराने हेलीकॉप्टरों को हटाकर उनकी जगह आधुनिक लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर (LUH) शामिल किए जाएंगे। सेना अगले आठ से दस वर्षों में लगभग 250 नए हेलीकॉप्टर शामिल करने की योजना पर काम कर रही है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा निर्मित चीता और चेतक हेलीकॉप्टर दशकों से भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं, विशेष रूप से सियाचिन ग्लेशियर और अन्य दुर्गम उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सैनिकों और रसद सामग्री की आपूर्ति के लिए। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इन हेलीकॉप्टरों से जुड़े कई हादसों ने उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार पिछले 10 से 12 वर्षों में 15 से अधिक चीता और चेतक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं, जिनमें कई पायलटों और सैन्य कर्मियों की जान गई है। ऐसे में सेना का आधुनिकीकरण कार्यक्रम और नए हेलीकॉप्टरों की खरीद सुरक्षा तथा परिचालन क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फिलहाल सेना की जांच टीम दुर्घटना के कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है और विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
रिपोर्ट: बंटी कुमार
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