युवा साहित्य अकादमी पुरस्कार 2026 घोषित: जम्मू फिर रह गया खाली हाथ, आखिर कब जागेगा साहित्य जगत?

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युवा साहित्य अकादमी पुरस्कार 2026 घोषित: जम्मू फिर रह गया खाली हाथ, आखिर कब जागेगा साहित्य जगत?

 साहित्य अकादमी पुरस्कार 2026 घोषित: जम्मू फिर रह गया खाली हाथ, आखिर कब जागेगा साहित्य जगत?

Sahitya Akademi द्वारा हाल ही में युवा साहित्य अकादमी पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। देशभर के कई राज्यों से युवा लेखकों को इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाज़ा गया, लेकिन एक बार फिर जम्मू क्षेत्र का नाम इस सूची में नदारद रहा। यह केवल एक चूक नहीं, बल्कि लगातार हो रही अनदेखी का संकेत भी माना जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर हमेशा से सांस्कृतिक और साहित्यिक रूप से समृद्ध रहा है। यहां की धरती ने कई बड़े साहित्यकार दिए हैं, लेकिन आज के दौर में जब युवा प्रतिभाओं को पहचान मिलने का समय है, तब जम्मू के लेखक पीछे क्यों छूट रहे हैं — यह एक गंभीर सवाल बन चुका है।

आखिर कमी कहां है?
सच कड़वा होता है, लेकिन कहना जरूरी है —
जम्मू के कई युवा लेखक खुद को आगे लाने में असफल हो रहे हैं। न तो सही मंच पर अपनी रचनाएं भेजी जाती हैं, न ही राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में सक्रिय भागीदारी दिखती है। केवल सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने से कोई “राष्ट्रीय लेखक” नहीं बन जाता।
दूसरी तरफ, कश्मीर घाटी से लगातार युवा लेखक उभर रहे हैं और राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं। वे मेहनत कर रहे हैं, आवेदन कर रहे हैं, नेटवर्क बना रहे हैं — और नतीजा सामने है।
सिर्फ सिस्टम को दोष देना सही नहीं
हर बार सरकार या संस्थाओं को दोष देना आसान है, लेकिन क्या हमने खुद कभी सोचा कि हम कितने तैयार हैं?
जम्मू के साहित्यिक संगठनों में भी सक्रियता की कमी साफ नजर आती है। न कोई बड़े स्तर की वर्कशॉप, न गाइडेंस, न ही युवा लेखकों को सही दिशा।

अब भी समय है संभलने का
अगर जम्मू के युवा लेखक सच में पहचान चाहते हैं, तो उन्हें:
अपनी रचनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर भेजना होगा
साहित्यिक प्रतियोगिताओं में भाग लेना होगा
प्रोफेशनल तरीके से लेखन को अपनाना होगा
और सबसे जरूरी — खुद को “सीरियस लेखक” बनाना होगा

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