इस प्रक्रिया में तेल को एक बड़े टॉवर में गर्म किया जाता है। अलग-अलग तापमान पर अलग-अलग पदार्थ भाप बनकर ऊपर उठते हैं और फिर ठंडे होकर अलग-अलग स्तरों पर जमा हो जाते हैं। हल्के पदार्थ ऊपर की तरफ निकलते हैं जबकि भारी पदार्थ नीचे की तरफ इकट्ठे होते हैं।
कच्चे तेल से बनने वाले प्रमुख उत्पाद
LPG (रसोई गैस) – लगभग 100°C
यह गैस घरों में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। इसे सिलेंडर में भरकर घरेलू उपयोग के लिए भेजा जाता है।
पेट्रोल – लगभग 200 से 250°C
पेट्रोल मुख्य रूप से कार, बाइक और अन्य छोटे वाहनों में ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है।
केरोसिन (मिट्टी का तेल) – लगभग 250 से 300°C
यह स्टोव, लैंप और कुछ मशीनों को चलाने के लिए इस्तेमाल होता है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
डीजल – लगभग 300 से 350°C
डीजल बस, ट्रक, ट्रैक्टर और बड़े वाहनों के लिए महत्वपूर्ण ईंधन है और भारी मशीनों में भी उपयोग होता है।
लुब्रिकेटिंग ऑयल
मशीनों के पुर्जों के बीच घर्षण कम करने और उन्हें सुचारु रूप से चलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
एविएशन फ्यूल
हवाई जहाज़ों को उड़ाने के लिए विशेष प्रकार का ईंधन बनाया जाता है, जो कच्चे तेल से ही प्राप्त होता है।
पैराफिन वैक्स
मोमबत्तियाँ, पॉलिश और कई औद्योगिक उत्पाद बनाने में इसका उपयोग किया जाता है।
निष्कर्ष
एक ही कच्चे तेल से कई तरह के ईंधन और उपयोगी वस्तुएँ तैयार की जाती हैं। यही कारण है कि कच्चा तेल दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक ऊर्जा संपत्तियों में से एक माना जाता है। इसके बिना आधुनिक परिवहन, उद्योग और ऊर्जा व्यवस्था की कल्पना करना मुश्किल है।
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