सूत्रों के अनुसार सरकार इस कदम को लोगों की सेहत और समाज में बढ़ती नशे की समस्या को देखते हुए उठा सकती है। कई सामाजिक संगठनों और धार्मिक समूहों ने पहले भी राज्य में नशे पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि युवाओं में बढ़ती लत को रोकने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं।
हालांकि इस प्रस्तावित बिल को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे समाज के हित में बड़ा कदम मान रहे हैं, जबकि व्यापारी वर्ग और शराब कारोबार से जुड़े लोग इसके खिलाफ भी आवाज उठा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे हजारों लोगों की रोज़गार पर असर पड़ सकता है और सरकार को राजस्व का भी नुकसान होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह बिल विधानसभा में पेश होता है तो इस पर व्यापक बहस हो सकती है। इसके बाद ही यह तय होगा कि जम्मू-कश्मीर में शराब, तंबाकू और सिगरेट पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगेगा या फिर कुछ सीमित नियम लागू किए जाएंगे।
0 Comments