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जम्मू-कश्मीर में डेली वेजर्स को बड़ी राहत: 55,983 कर्मचारियों के नियमितीकरण को मंजूरी

जम्मू-कश्मीर में डेली वेजर्स को बड़ी राहत: 55,983 कर्मचारियों के नियमितीकरण को मंजूरी ।


जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से नौकरी की सुरक्षा की मांग कर रहे डेली वेजर्स (Daily Wagers) के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री Omar Abdullah के नेतृत्व वाली सरकार ने नियमितीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए 55,983 कर्मचारियों को SRO-64 के तहत क्लियर कर दिया है।

कुल कितने कर्मचारियों को मिला फायदा?

सरकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक:

55,983 डेली वेजर्स को नियमितीकरण के लिए मंजूरी दी गई है

इसके अलावा 2,497 चुनाव से जुड़े डेली रेटेड वर्कर्स (DRWs) को भी शामिल किया गया है

इस तरह कुल संख्या 58,000 से अधिक पहुंच रही है


क्षेत्रीय भेदभाव के आरोप खारिज

सरकार ने साफ तौर पर उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि प्रक्रिया में किसी क्षेत्र विशेष को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुसार की जा रही है।

चरणबद्ध तरीके से होगा नियमितीकरण

सरकार ने बताया कि यह प्रक्रिया एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध (phased manner) में लागू की जाएगी:

शुरुआत वर्ष 2026 से होगी

प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत और वित्तीय रूप से संतुलित रखा जाएगा


हाई-पावर कमेटी कर रही है निगरानी

इस पूरे मामले की जांच और निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई-पावर कमेटी बनाई गई है।

कमेटी यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में कोई कानूनी अड़चन न आए

साथ ही राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी संतुलन बना रहे


किन विभागों के कर्मचारी शामिल?

इस फैसले से सबसे ज्यादा लाभ इन विभागों के कर्मचारियों को मिलेगा:

जल शक्ति विभाग (PHE)

पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (PDD)

पब्लिक वर्क्स (R&B)


1 लाख से ज्यादा कर्मचारियों का क्या होगा?

विधानसभा में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने बताया कि:

राज्य में 1 लाख से अधिक डेली वेजर्स रजिस्टर्ड हैं

लेकिन नियमितीकरण केवल उन्हीं का होगा जो

सेवा रिकॉर्ड

पात्रता (Eligibility)

और कोर्ट के निर्देशों को पूरा करते हैं



वर्षों पुरानी मांग पूरी होने की उम्मीद

यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, जो वर्षों से बिना स्थायी नौकरी और सुरक्षा के काम कर रहे थे।
डेली वेजर्स, कैजुअल लेबर और एड-हॉक कर्मचारियों की यह मांग काफी समय से लंबित थी, जिसे अब सरकार ने गंभीरता से लिया है।


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 कुल मिलाकर, यह कदम जम्मू-कश्मीर में रोजगार सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि, सभी की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सरकार इस योजना को कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ लागू करती है।

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